इस बढ़ती संक्रामकता से तुम मुक्त हो जाओ पाक
पाकिस्तान में तख्ता पलट की आग कुछ ठंडी पड़ी है लेकिन पाक के बड़े पदासीन लोगों ने बीतें दिनों जिस तरह इस देश में अस्थिरता के हालात उत्पन्न किये हैं उससे न केवल पाक में आग लगी है बल्कि उसकी आंच भारत पर भी आ रही है .
ताज्जुब यह है की सरकार के अंगों की तरह कार्य करने वाली सेना और न्यायपालिका न केवल सरकार को चेतावनी दे रही है साथ ही अपने गंभीर मंसूबें भी जाहिर कर रही है यह उस दोहराव की स्थिति है जिसके तहत पाकिस्तान में तीन मर्तबा सेना सरकार का तखता पलट कर काबीज हुई है .अब यह स्थिति फिर बन रही है हालाँकि फिलवक्त कुछ ठहर सी गई है ,फिर भी तख्ता पलट कर राज़ करने की संकीर्ण मानसिकता की फलफूल रही संक्रामकता से पाक अब भी मुक्त नहीं हुआ है .राष्ट्रपति जरदारी और प्रधानमंत्री गिलानी ठीक से रात गुजार नहीं पा रहे है कब उन्हें लोकतंत्र को दबोच देने वाले ना -पाक इरादे सोते हुए ही जकड ले , यह स्थिति किसी भी देश के लिए सर्वथा चुनौतीपूर्ण होती है इसलिए भी कि कोई भी देश इन हालातों में आगे नहीं बढ सकता .पाकिस्तान में जिस तरह के आज हालात है वह किसी भी सरकार के लिए मुश्किलों भरे है ऐसे में सेना की धमकी पाकिस्तान को और गड्डे में ले जा रही है .
पाक जाए गड्डे में यह हम सोच सकते है इसलिए कि जिस तरह के सम्बन्ध हमारे पाकिस्तान से रहे हैं वे हमें पाकिस्तान का हितैषी कभी नहीं बना सकते लेकिन जो हालात आज पाक में बने हैं वे हमारे लिए भी मुसीबत बन सकते हैं , जरुरी यह है की पाकिस्तान में चाहे जिस दल की सरकार बनें पर चुनी हुई और लोकतान्त्रिक सरकार हो, यही भारत के लिए बेहद जरुरी है . पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि जब जब वहां फौज ने शासन किया है , भारत के लिए उसने मुश्किलें पैदा की है .यह मुश्किलें चाहे कश्मीर विवाद की हों ,चाहे इस बहाने बढ़ते आतंकवाद की हो या फिर युद्ध के हालात उत्पन्न करने की हो .पाक के तानाशाही हुक्मरानों के समय पाकिस्तान सिर्फ भारत से दुश्मनी ही करता रहा है , पाक सेना और ख़ुफ़िया एजेंसी आय एस आई भारत में अलगाव वादियों को उकसाने , आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने , आतंकवादी हमले के लिए व्यूह रचने और साज़िश से युद्ध करने के लिए बदनाम है . जब जब सेना का सता पर कब्ज़ा रहा है भारत विरोधी यह अभियान पाक ने ज्यादा चलाया है
इसलिए भारत के पक्ष में यही है कि वहां जब सरकार बने जो भी सरकार बने जो भी राजनैतिक पार्टी जीते लेकिन वह जनता की लोकतान्त्रिक सरकार हो . गिलानी के बीतें तीन साल भारत के पक्ष में रहे हैं इस बीच दोनों के दोस्ताना और व्यापारिक सम्बन्ध बड़े है और उससे ज्यादा इस दौरान भारत में आतंकी घटनाओं में बेहद कमी आई है साथ ही कश्मीर में भी घुसपैठ बहुत कम हो गयी है . इसलिए जरुरी है पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार चले और स्थिरता बनी रहे . वहां तानाशाही से पनपते आतंकवाद , युद्धवाद के संक्रामक वायरस भारत नहीं आयें ,साथ ही विश्व के इस सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश के सभी सरकारी अंगों का मिजाज़ भी लोकतान्त्रिक बना रहे उस पर पड़ोस का असर न हो . इसलिए कामना यही हो इस बढ़ती संक्रामकता से तुम मुक्त हो जाओ पाक .!
पाकिस्तान में तख्ता पलट की आग कुछ ठंडी पड़ी है लेकिन पाक के बड़े पदासीन लोगों ने बीतें दिनों जिस तरह इस देश में अस्थिरता के हालात उत्पन्न किये हैं उससे न केवल पाक में आग लगी है बल्कि उसकी आंच भारत पर भी आ रही है .
ताज्जुब यह है की सरकार के अंगों की तरह कार्य करने वाली सेना और न्यायपालिका न केवल सरकार को चेतावनी दे रही है साथ ही अपने गंभीर मंसूबें भी जाहिर कर रही है यह उस दोहराव की स्थिति है जिसके तहत पाकिस्तान में तीन मर्तबा सेना सरकार का तखता पलट कर काबीज हुई है .अब यह स्थिति फिर बन रही है हालाँकि फिलवक्त कुछ ठहर सी गई है ,फिर भी तख्ता पलट कर राज़ करने की संकीर्ण मानसिकता की फलफूल रही संक्रामकता से पाक अब भी मुक्त नहीं हुआ है .राष्ट्रपति जरदारी और प्रधानमंत्री गिलानी ठीक से रात गुजार नहीं पा रहे है कब उन्हें लोकतंत्र को दबोच देने वाले ना -पाक इरादे सोते हुए ही जकड ले , यह स्थिति किसी भी देश के लिए सर्वथा चुनौतीपूर्ण होती है इसलिए भी कि कोई भी देश इन हालातों में आगे नहीं बढ सकता .पाकिस्तान में जिस तरह के आज हालात है वह किसी भी सरकार के लिए मुश्किलों भरे है ऐसे में सेना की धमकी पाकिस्तान को और गड्डे में ले जा रही है .
पाक जाए गड्डे में यह हम सोच सकते है इसलिए कि जिस तरह के सम्बन्ध हमारे पाकिस्तान से रहे हैं वे हमें पाकिस्तान का हितैषी कभी नहीं बना सकते लेकिन जो हालात आज पाक में बने हैं वे हमारे लिए भी मुसीबत बन सकते हैं , जरुरी यह है की पाकिस्तान में चाहे जिस दल की सरकार बनें पर चुनी हुई और लोकतान्त्रिक सरकार हो, यही भारत के लिए बेहद जरुरी है . पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि जब जब वहां फौज ने शासन किया है , भारत के लिए उसने मुश्किलें पैदा की है .यह मुश्किलें चाहे कश्मीर विवाद की हों ,चाहे इस बहाने बढ़ते आतंकवाद की हो या फिर युद्ध के हालात उत्पन्न करने की हो .पाक के तानाशाही हुक्मरानों के समय पाकिस्तान सिर्फ भारत से दुश्मनी ही करता रहा है , पाक सेना और ख़ुफ़िया एजेंसी आय एस आई भारत में अलगाव वादियों को उकसाने , आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने , आतंकवादी हमले के लिए व्यूह रचने और साज़िश से युद्ध करने के लिए बदनाम है . जब जब सेना का सता पर कब्ज़ा रहा है भारत विरोधी यह अभियान पाक ने ज्यादा चलाया है
इसलिए भारत के पक्ष में यही है कि वहां जब सरकार बने जो भी सरकार बने जो भी राजनैतिक पार्टी जीते लेकिन वह जनता की लोकतान्त्रिक सरकार हो . गिलानी के बीतें तीन साल भारत के पक्ष में रहे हैं इस बीच दोनों के दोस्ताना और व्यापारिक सम्बन्ध बड़े है और उससे ज्यादा इस दौरान भारत में आतंकी घटनाओं में बेहद कमी आई है साथ ही कश्मीर में भी घुसपैठ बहुत कम हो गयी है . इसलिए जरुरी है पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार चले और स्थिरता बनी रहे . वहां तानाशाही से पनपते आतंकवाद , युद्धवाद के संक्रामक वायरस भारत नहीं आयें ,साथ ही विश्व के इस सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश के सभी सरकारी अंगों का मिजाज़ भी लोकतान्त्रिक बना रहे उस पर पड़ोस का असर न हो . इसलिए कामना यही हो इस बढ़ती संक्रामकता से तुम मुक्त हो जाओ पाक .!