Saturday, 14 January 2012

इस बढ़ती  संक्रामकता से तुम मुक्त हो जाओ पाक
पाकिस्तान  में  तख्ता  पलट की आग कुछ ठंडी पड़ी है लेकिन पाक के बड़े पदासीन लोगों ने  बीतें दिनों जिस तरह इस देश में अस्थिरता के हालात उत्पन्न किये हैं उससे न केवल पाक में आग लगी है बल्कि उसकी आंच भारत पर भी आ रही है .
ताज्जुब यह है की सरकार के अंगों की तरह कार्य करने वाली  सेना और न्यायपालिका न केवल सरकार को चेतावनी दे रही है साथ ही अपने गंभीर  मंसूबें भी जाहिर कर रही है यह उस दोहराव की स्थिति है जिसके तहत पाकिस्तान में तीन मर्तबा सेना सरकार का तखता पलट कर काबीज हुई है .अब यह स्थिति फिर बन रही है हालाँकि  फिलवक्त कुछ ठहर सी गई है ,फिर भी तख्ता पलट कर राज़ करने की संकीर्ण मानसिकता की फलफूल रही संक्रामकता से पाक अब भी मुक्त नहीं हुआ है .राष्ट्रपति जरदारी और प्रधानमंत्री गिलानी ठीक से रात गुजार नहीं पा रहे है कब उन्हें लोकतंत्र को दबोच देने वाले  ना -पाक इरादे सोते हुए ही जकड ले , यह स्थिति किसी भी देश के लिए सर्वथा चुनौतीपूर्ण  होती  है इसलिए भी कि कोई भी देश इन हालातों  में आगे नहीं बढ सकता .पाकिस्तान में जिस तरह के आज हालात है वह किसी भी सरकार के लिए मुश्किलों भरे  है ऐसे में सेना की धमकी पाकिस्तान को और गड्डे में ले जा रही है .
पाक जाए गड्डे में यह हम सोच सकते है इसलिए कि जिस तरह के सम्बन्ध हमारे पाकिस्तान से रहे हैं वे हमें पाकिस्तान का हितैषी कभी नहीं बना सकते लेकिन जो हालात आज पाक में बने हैं वे हमारे लिए भी मुसीबत  बन सकते हैं , जरुरी यह है की पाकिस्तान में चाहे जिस दल की सरकार बनें पर चुनी हुई और लोकतान्त्रिक सरकार हो, यही  भारत के लिए बेहद जरुरी है . पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि  जब जब वहां फौज ने शासन किया है , भारत के लिए उसने मुश्किलें पैदा की है .यह मुश्किलें चाहे कश्मीर विवाद की हों ,चाहे इस बहाने बढ़ते आतंकवाद की हो या फिर युद्ध के हालात उत्पन्न करने की हो .पाक के तानाशाही हुक्मरानों के समय पाकिस्तान सिर्फ भारत से दुश्मनी ही करता रहा है , पाक सेना और ख़ुफ़िया एजेंसी आय एस आई  भारत में अलगाव वादियों  को उकसाने , आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने , आतंकवादी हमले के लिए व्यूह रचने और साज़िश से युद्ध करने के लिए बदनाम है . जब जब सेना का सता पर कब्ज़ा रहा है भारत विरोधी यह अभियान पाक ने ज्यादा चलाया है
इसलिए भारत के पक्ष में यही है कि वहां जब सरकार बने जो भी सरकार बने जो भी राजनैतिक पार्टी  जीते लेकिन वह जनता की लोकतान्त्रिक सरकार हो . गिलानी के बीतें तीन साल भारत के पक्ष में रहे हैं इस बीच दोनों के दोस्ताना और व्यापारिक सम्बन्ध बड़े है और उससे ज्यादा इस दौरान भारत में आतंकी घटनाओं में बेहद कमी आई है साथ ही कश्मीर में भी घुसपैठ बहुत कम हो गयी है . इसलिए जरुरी है पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार चले और स्थिरता बनी रहे . वहां तानाशाही से पनपते आतंकवाद , युद्धवाद  के  संक्रामक वायरस भारत नहीं आयें ,साथ ही विश्व के इस सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश के सभी सरकारी अंगों का मिजाज़ भी लोकतान्त्रिक बना रहे उस पर पड़ोस का असर न हो . इसलिए कामना यही हो इस बढ़ती  संक्रामकता से तुम मुक्त हो जाओ पाक .!

Saturday, 7 January 2012

कीचड में कूदने के मायने ..


यूपी में  चुनाव के पहले मायावती ने जो बल्लम घुमाया उसकी मार बीजेपी को लग रही है .बसपा के दागी और बदनाम मंत्री बाबूसिंह रघुवंशी से   पल्ला झाड़ कर मायावती ने खुद को तो बचा लिया लेकिन भाजपाई  फंस गए . बताया जा रहा है भाजपा बाबूसिंह रघुवंशी के करोडो के मोहजाल में नहीं जातिगत समीकरण के चक्कर में जा फंसी है लेकिन क्या जानकर कोई कीचड़ में कूदता है ? यह सवाल आज गर्म है .

दरअसल बाबूसिंह रघुवंशी को बसपा से निकाले जाने और भाजपा में शामिल किये जाने के गहरे राजनैतिक अर्थ है ,यह कोई वाले वाले काम नहीं हो गया है , इसकी पूरी तैयारी पहले से ही हो सकती है . यह कैसे हो सकता है कि ऍन  चुनाव के पहले मायावती अपने सबसे बदनाम और खास मंत्री को अचानक निकाल बाहर कर दे और तभी अचानक एक दरवाज़ा खुले ,और बाहर लिया गया व्यक्ति एक बड़ी पार्टी में शामिल कर लिया जाए . लगता है यह दोनों तरफ की  पूर्व तैयारी ही थी जिसे परोसा ऐसा गया है कि वह नई डिश लगे .  काशीराम के पूर्व  टेलीफोन ओपरेटर  और माया सरकार के दुधारू गाय की तरह कमाने वाले मंत्री बाबूसिंह रघुवंशी जब इअताने बदनाम हो चले की बसपा के लिए मुश्किले बन जाने की संभावना बढ़ गई तो मायावती के लिए समझदारी इसी में थी कि बाबूसिंह रघुवंशी को आउट करें .लेकिन मायावती सरकार में अकेले बाबूसिंह या  एक दो ही भ्रष्ट हों ऐसा नहीं है फिर बाबूसिंह को बाहर किये जाने के पीछे और भी कारण जरुर होंगें जो पहले से ही बन - पक रहे होंगें .

 मायावती दमदार महिला हैं वो कभी ऐसा नहीं कर सकती हैं कि फायदे की कोई चीज़ हाथ से चली जाए .बाबूसिंह से हो रहे नुकसान का सारा गणित मायावती ने जांच परख लिया होगा उन्हें जब लग रहा होगा कि बाबूसिंह रघुवंशी अभी कोई काम के नहीं हैं उन्होंने उसे बाहर कर दिया .और यह दिखला दिया कि वह दागदार मंत्रियों पर कड़ी कारवाई कर सकती हैं . इससे मायावती को दो फायदे हुए एक. नुकसान वाला काम ख़त्म हो गया . दो. भ्रष्टाचारी  पर कारवाई कर मायावती स्वयं स्वच्छ और साफ़ हो गयी हालांकी बुंदेलखंड में उनका गणित भी कुछ गड़बड़ा सकता है .
वहीँ भाजपा भी कोई ऐसे ही बाबूसिंह को तुरत फुरत अन्दर लेने को तैयार नहीं हो गयी होगी . उसकी भी पहले से ही तैयारी लगती है . किरीट सोमैय्या के मार्फ़त आरोपों के घेरे में लेने का काम भी एक साजिश हो सकती है . वह यह कि  आरोपों से मायावती को इतना गड़बड़ा दो कि बुंदेलखंड के इस  बड़े  नेता को बाहर करने के लीये मायावती मजबूर हो जाए और ऐसा हुआ जब बाबूसिंह समेत एनी भी बाहर किये गए .भाजपा की यह पूर्व तैयारी इसलिए भी लगती है कि बीते साल मार्च में मुरादाबाद के जिस मिड -टाउन क्लब में भाजपा के बड़े नेता जिनमें मुख्तार अब्बास नकवी, कलराज मिश्रा, सूर्यप्रताप शाही, मुरली मनोहर जोशी और विनय कटियार भी थे , एकत्र हुए थे वह आयोजन बाबूसिंह रघुवंशी के खासम ख़ास सौरभ जैन का था और तब सौरभ ने तीन हज़ार कार्यकर्ताओं की पार्टी करने में भाजपा पर बड़े उपकार किये थे .यहीं से वह गणित बना तैयार हो गया था जिसका परिणाम  बाबूसिंह रघुवंशी को भाजपा  में शामिल करना है . मायावती बाबूसिंह को बर्खास्त नहीं करती तब भी बाबूसिंह मायावती के लिए सरदर्द बन सकते थे और भाजपा का सुप्पोर्ट एन चुनाव के वक़्त कर सकते थे . माया ने यह सब भांप कर ही बाबूसिंह को बर्खास्त किया हो .
जाहिर है यह राजनैतिक खेल है जो पहले से ही तैयार किया गया लगता है , भाजपा बिना फायदे के एकाएक चुनाव में बदनामी  क्यों मोल लेती यह राजनैतिक दुराचार  जरुर लगता है और गडकरी चूँकि  अध्यक्ष हैं इसलिए गड़बड़ी उनकी नज़र आ रही है पर इसमे कई नेता शामिल रहे है जो रन ले लिए जमीन तैयार कर रहे थे .यह इसलिए भी कि कोई कीचड में जानकार नहीं कूदता है और कमल जो जानता है वह कीचड में ही बेहतर खिलता है वह भी ऐसे कभी कीचड में कूदता नहीं है ,यह ज़रूर कि नैतिकता की डगाल  नाज़ुक  होती है और कीचड में भी कूदने से वह धराशायी हो सकती है .
सुरेन्द्र बंसल