Thursday, 4 January 2018

भाव अंतर

मै भी करता हूँ प्यार 
उनसे 
जो बहते हैं साथ 
मेरे , भावों में ,
समंदर के भीतर 
भावनाओं की गर्त में ,
विचारों के स्वच्छंद 
आकाश में, 
विचरण करते हुए 
अनन्त केनवास पर ,
इस छोर से उस छोर तक
अभिलाषाओं को रख, 
कहीं संभावनाओं के साथ
अनन्त, अनंत, अनंत,
अविरत, अविराम
प्यार के साथ....

सुरेन्द्र बंसल 
16003012018