*अंदाज़ अपना - सुरेंद्र बंसल का पन्ना*
*मेरी स्वप्नदृष्टि* ...
कल रात पता नहीं कब उपचुनावों के परिणाम देखते, भांपते नींद लग गई । मन उहाफोह में था ,आखिर इस परिणाम का क्या असर होने वाला है, कैसा राजनैतिक समय आने वाला है , क्या एक शुरू हुए युग का अंत होनेवाला है , यह क्या नए राजनैतिक गठबंधन की अनैतिक शुरुवात है या बस समुंदर की उछाल लेती ऐसी लहरें है जो स्वतः ही शांत हो जाती है।
सो गया तो मन अपने भ्रमण पर निकल गया जिसे स्वप्न कहते हैं... मैंने स्वप्नदृष्टि में देखा कि बहुत सारे अनुशासित लोग गंभीर और चिंतन मुद्रा में खड़े हैं .....एक स्ट्रेचर नुमा टेबल पर कमल का फूल रखा है ..... शायद कुछ गम्भीर मामला है .....मैं समझा नहीं कमल का फूल क्यों रखा है.... और वे चिंतनशील वर्ग के अनुशासित लोग कौन है, जो कुछ पहचाने से लगते हैं .... कुछ पल गुजरते ही आहटें बढ़ जाती है शायद वीवीआइपी आ रहे हैं....अब मैं समझ चुका था सरकार आ रही है....कुछ ही पलों में बहुत सी गाड़ियां दनदनाती सी बाहरी कॉरिडोर में रुकी..... कई किस्म के वीआईपी अंदर आते जा रहे थे....सब हड़बड़ी में थे......उस फूल के पास मज़मा लग गया था....
अनुशासित लोगों में से एक वरिष्ठ के हाथ मे डॉक्टर वाला स्टेथस्कोप था...सपने में ही मैंने सोचा शायद ये सज्जन इस फूल की जांच करेंगे....पर नहीं वे वरिष्ठ वीआईपी के नज़दीक कुछ तेज़ ही बुदबुदाए... शायद उनका मकसद था यह बताना की देखो फूल की हृदय गति जिसे आंग्ल में हार्टबीट कहते हैं बढ़ी
हुई है...सभी वीवीआइपी ने स्टेथस्कोप से फूल के हृदय की धड़कनों को परखा भी....लग रहा था सभी ने महसूस किया धड़कने सामान्य से कहीं तेज़ और अनियमित है ...
ओह्ह तो यह घबराहट की बात है... नहीं ....अचानक ही अनुशासित वरिष्ठ बोल पड़े.....घबराहट की कोई बात नहीं , यह चेतावनी और सावधानी की बात है....फूल अभी स्वस्थ है बस कुछ सांस फूल गई है...लेकिन क्यों इस पर सब कोई चिंतन कीजिये...यही चलता रहा तो यह फूल जल्दी अस्वस्थ होकर मुरझा जाएगा...
उन वरिष्ठ ने 'भौं' तिरेर कर सबकी तरफ देखा...कहा आप लोग क्या करते है.... यह फूल हम सबकी सांसे है... इनका दम फूल गया तो हम सब.....आगे सभी समझ चुके थे.....उन्होंने फिर वरिष्ठ कंसल्टिंग फिजिशियन की तरह कहा देखो....अपनी रीति - नीति के खान- पान पर ध्यान दो....कुछ काम करते रहो....निठल्ले बैठे रहोगे तो चर्बी बढ़ जाएगी....फूल को स्वस्थ रखना है तो स्वस्थ मन से स्वस्थ तन से काम करते रहना है....रोज़ एक्सरसाइज इन हालातों में जरूरी होती है.....बाहर निकलों लोगो से मिलें जुलों , ऐसा करने से मन और तन को स्वस्थ रखने के उपाय मालूम पड़ते हैं...मॉर्निंग वॉक और ईवनिंग वाक को नियमित करो ...कोई विदेशी इलाज नहीं दे रहा हूँ , देशी और स्वदेशी इलाज पूरी निष्ठा और चैतन्य होकर करो.....फूल को स्वस्थ रखना है तो यह खुराक सबको लेना पड़ेगी ...नहीं तो उम्मीद छोड़ दो....उन्होंने यह सारगर्भित इलाज बताकर जोर से अपना बूट ठोका और दायाँ हाथ सीने तक लाये...सबने यही दोहराया और सब तेज़ी से बाहर निकल गए...
बूटों की तेज आवाज़ से अपना स्वप्न भंग हो गया...अपन ने आंखे मली अध खुले नेत्रों से देखा इधर उधर अंधेरे को चीरता एक सन्नाटा था... मैं समझ गया यह एक सपना था..किस तरह का और कैसा था...आप भी समझ ही जायेंगे.....
*सुरेंद्र बंसल*
15032018
*मेरी स्वप्नदृष्टि* ...
कल रात पता नहीं कब उपचुनावों के परिणाम देखते, भांपते नींद लग गई । मन उहाफोह में था ,आखिर इस परिणाम का क्या असर होने वाला है, कैसा राजनैतिक समय आने वाला है , क्या एक शुरू हुए युग का अंत होनेवाला है , यह क्या नए राजनैतिक गठबंधन की अनैतिक शुरुवात है या बस समुंदर की उछाल लेती ऐसी लहरें है जो स्वतः ही शांत हो जाती है।
सो गया तो मन अपने भ्रमण पर निकल गया जिसे स्वप्न कहते हैं... मैंने स्वप्नदृष्टि में देखा कि बहुत सारे अनुशासित लोग गंभीर और चिंतन मुद्रा में खड़े हैं .....एक स्ट्रेचर नुमा टेबल पर कमल का फूल रखा है ..... शायद कुछ गम्भीर मामला है .....मैं समझा नहीं कमल का फूल क्यों रखा है.... और वे चिंतनशील वर्ग के अनुशासित लोग कौन है, जो कुछ पहचाने से लगते हैं .... कुछ पल गुजरते ही आहटें बढ़ जाती है शायद वीवीआइपी आ रहे हैं....अब मैं समझ चुका था सरकार आ रही है....कुछ ही पलों में बहुत सी गाड़ियां दनदनाती सी बाहरी कॉरिडोर में रुकी..... कई किस्म के वीआईपी अंदर आते जा रहे थे....सब हड़बड़ी में थे......उस फूल के पास मज़मा लग गया था....
अनुशासित लोगों में से एक वरिष्ठ के हाथ मे डॉक्टर वाला स्टेथस्कोप था...सपने में ही मैंने सोचा शायद ये सज्जन इस फूल की जांच करेंगे....पर नहीं वे वरिष्ठ वीआईपी के नज़दीक कुछ तेज़ ही बुदबुदाए... शायद उनका मकसद था यह बताना की देखो फूल की हृदय गति जिसे आंग्ल में हार्टबीट कहते हैं बढ़ी
हुई है...सभी वीवीआइपी ने स्टेथस्कोप से फूल के हृदय की धड़कनों को परखा भी....लग रहा था सभी ने महसूस किया धड़कने सामान्य से कहीं तेज़ और अनियमित है ...
ओह्ह तो यह घबराहट की बात है... नहीं ....अचानक ही अनुशासित वरिष्ठ बोल पड़े.....घबराहट की कोई बात नहीं , यह चेतावनी और सावधानी की बात है....फूल अभी स्वस्थ है बस कुछ सांस फूल गई है...लेकिन क्यों इस पर सब कोई चिंतन कीजिये...यही चलता रहा तो यह फूल जल्दी अस्वस्थ होकर मुरझा जाएगा...
उन वरिष्ठ ने 'भौं' तिरेर कर सबकी तरफ देखा...कहा आप लोग क्या करते है.... यह फूल हम सबकी सांसे है... इनका दम फूल गया तो हम सब.....आगे सभी समझ चुके थे.....उन्होंने फिर वरिष्ठ कंसल्टिंग फिजिशियन की तरह कहा देखो....अपनी रीति - नीति के खान- पान पर ध्यान दो....कुछ काम करते रहो....निठल्ले बैठे रहोगे तो चर्बी बढ़ जाएगी....फूल को स्वस्थ रखना है तो स्वस्थ मन से स्वस्थ तन से काम करते रहना है....रोज़ एक्सरसाइज इन हालातों में जरूरी होती है.....बाहर निकलों लोगो से मिलें जुलों , ऐसा करने से मन और तन को स्वस्थ रखने के उपाय मालूम पड़ते हैं...मॉर्निंग वॉक और ईवनिंग वाक को नियमित करो ...कोई विदेशी इलाज नहीं दे रहा हूँ , देशी और स्वदेशी इलाज पूरी निष्ठा और चैतन्य होकर करो.....फूल को स्वस्थ रखना है तो यह खुराक सबको लेना पड़ेगी ...नहीं तो उम्मीद छोड़ दो....उन्होंने यह सारगर्भित इलाज बताकर जोर से अपना बूट ठोका और दायाँ हाथ सीने तक लाये...सबने यही दोहराया और सब तेज़ी से बाहर निकल गए...
बूटों की तेज आवाज़ से अपना स्वप्न भंग हो गया...अपन ने आंखे मली अध खुले नेत्रों से देखा इधर उधर अंधेरे को चीरता एक सन्नाटा था... मैं समझ गया यह एक सपना था..किस तरह का और कैसा था...आप भी समझ ही जायेंगे.....
*सुरेंद्र बंसल*
15032018