यथा योग्य मेरे मौलिक विचार हैं ..यह मेरी सोच का एक प्रस्फुटन है उस दिशा की ओर जहाँ प्रकृति अपनी पूर्णता और सुन्दरता का आभास देती है साथ ही यह अवसर भी देती है कि यदि विचार सुन्दर हो, कोमल हो ,उसमे तेज़ हो तो यह संसार भी उतना ही सुन्दर होगा ...
Surendra Bansal
Sunday, 24 February 2013
SURENDRA BANSAL kee Kalam se: तंत्र को यह देखना ही होगा कि उसका यन्त्र कैसा है
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